Sunday, April 18, 2010

naam

लिखना चाहू जो मैं कुछ ,हाथ मेरा थम जाता है,
लिखना चाहती हूँ मैं आलीशा , वो _____ बन जाता है
कहना चांहू जो तुझसे कुछ तो कंठ अविरुद्ध हो जाता है
जाना चांहू जो तुझसे दूर दिल तेरे पास रह जाता है....

होती हूँ जो साथ तेरे सब सुंदर सा हो जाता है
तू जो मुझको देखे तो रूप मेरा खिल जाता है
लिखना चांहू जो प्यार भी नाम तेरा याद आता है
गूँज गूँज मेरे कानो में नाम तेरा तडपता है

हम दोनों की रुहू का तो जन्मो से हे नाता है,
तू माने या माने तू भी मुझको चाहता है,
बातें मेरी अंदाज़ मेरा तुझे भी लुभाता है,
पर ना जाने क्यों तू इकरार से कतराता है

ना कर तू इकरार भी आँखें इज़हार कर जाती है
छुप छुप के यह आँखें मुझे तेरा हाल- e-दिल बताती है
जो ना चांहू लिखना तो कलम खुद ही चल जाती है
रह रह के हर कागज़ पे नाम तेरा सजाती है

इस रिश्ते की डोर को मैं और मज़बूत बनाउंगी
अपने प्यार के महल को अपनी साँसों से सजाऊँगी
पर जो तू ना मिल पाया तो , कांच सी टूट जाउंगी
अपने अश्कों को उन् पन्नो पे बहाउंगी, और उनसे मैं तेरे नाम को mitaaungi

अब तेरा मेरी कलम से रिश्ता गहरा हुआ जा रहा है
हर अक्षर में आज मुझे तेरा चेहरा नज़र रहा है

Tuesday, April 6, 2010

Alfaaz...

here also don hav alfaaz to even describe dis poem.....
but hope u ppl will understand dis silence described in my way.....

kehna hai tujhse bahut kuch,
par alfaaz kahan se lau???

gugunana hai tere kaano me kuch,
par jo bhaye tujhe wo geet kahan se lau??

sona chahti hun main tamaam umar teri baahon me,
par jo na toote tere khayal se wo khawab kahan se lau??

"sohni" ke paas b kaccha ghada tha doobne ko,
tere naam se koi dooba de wo saagar kahan se lau??

itna yakeen hai iss muqaddar par ki khuda ne tujhe mera bna kar bheja hai...
par tujhe b ho meri chahat ka ehsaas wo dua kahan se lau???

nhi udeek sakti main tujhe umar bhar,
tu bhi samjhe isse wo jasbhat kahan se lau??

toot jana chahti hun teri bhahon me main,
par jo lubhaye tujhe wo kashish kahan se lau???

dhoop me to koi b pighal jaye,
chandni jiski pighla de wo chand kahan se lau???

kehna hai tujhse bahut kuch par alfaaz kahan se lau???

( sohni= belovered of mahiwal

udeek= intzaar)