Friday, July 23, 2010

chees...

aaj yun toot kar har aansu meri hatheli me samya hai,
maano ik thake hue bache ko maa ne godh me sulaya hai,
yun toot gyi main aaj bikhar kar ,
toota hai koi mehal jaise taash ka bankar

par apni vaydha sunanne ko mujhe koi na mila
apne aansuon se maine inn hontho ko sila,
mere mann ki awaaz itne zor se karhai the,
wo chees mere dimaag ki nas tak samayi the,

sawalon ka yudh chal rha tha mere mann me,
rasta bhoola ho jaise koi van me
ik lambi saans ko taras gye hum,
aansu bole jitne the aaj baras gye hum


आज यूँ टूट कर हर आंसू मेरी हथेली में समाया है ,
मानो इक थके हुए बच्चे को माँ ने गोद में सुलाया है ,
यूँ टूट गयी मैं आज बिखर कर ,
टूटा है कोई महल जैसे ताश का बनकर

पर अपनी व्यथा सुनांने को मुझे कोई ना मिला
अपने आंसुओं से मैंने इन् होंठो को सिला ,
मेरे मनं की आवाज़ इतने जोर से कर्हाई थी ,
वो चीस मेरे दिमाग की नस तक समायी थे ,

सवालों का युद्ध चल रहा था मेरे मन में ,
रास्ता भूला हो जैसे कोई वन में
इक लम्बी सांस को तरस गये हम ,
आंसू बोले जितने थे आज बरस गये हम


Monday, July 5, 2010

ateet

part 3
dis is the 3rd part of vedna as the previous one it is also the real lyf story of her daughter...how she feels without the love of her father, how her childhood was spent in the domestic violence.... but still she owes a personality dat inspires loads of ppl!!!
it is a technical poem n i hope ol d engg(spcly civil engg) will njy dis.....
here every pillar is compared wid sum1 in her lyf.......

main ik teen stanbh ki chaukar imaarat hun,
ik majboot neev par kamjoor chat,
mujhe log kla ka karishma kehte hai,
mujhe niharne ko mere paas rehte hai...
kisi ki mujhe sanwarne ki tammana hai
to kisi ki mujhe khareedne ki ichcha!!


anjaan hai sab ki ek stanbh kamjoor bhi hai,
main majboot bane khadi hun to raaz kuch or bhi hai
iss stanbh ko kamjoor karta mera attet hai,
fir bhi na jaane kyu mujhe isse he preet hai,


ik samne ka stanbh hai,
jiska sariya buland hai,
wo meri chhat ko tikaye khada hai,
shayad yeh sariya shakatishali bda hai!!


mera teesra stanbh sabse anokha hai,
kab kamjoor ho jayega sab aankh ka dhokha hai,
yeh toh kuch hisson se bna hai,
iska ek ansh mere aansuon se sna hai,


jab lagta hai main deh jaungi ,
yeh stanbh mujhe sambhalta hai,
apne vishwas ko mere astitav me dhalta hai!!!


jald he mujhe chutha stanbh banana hai,
iss chat ko ab manjil bnana hai,
par iss stanbh ki zimmedari badi hai,
mujhe sambhala hai usse thodi mushkil ghadi hai,


dekhna yeh hai ki yeh kismat kya rang dikhayegi,
manzil bnegi yahan ya yeh chat bhi deh jayegi!!!!




मैं इक तीन स्तंभ की चौकर इमारत हूँ ,
इक मजबूत नीव पर कमजोर छत ,
मुझे लोग कला का करिश्मा कहते है ,
मुझे निहारने को मेरे पास रहते है ...
किसी की मुझे सँवारने की तम्मना है
तो किसी की मुझे खरीदने की इच्छा !!


अनजान है सब की एक स्तंभ कमजोर भी है ,
मैं मजबूत बने कड़ी हूँ तो राज़ कुछ और भी है
इस स्तंभ को कमजोर करता मेरा अतीत है ,
फिर भी न जाने क्यों मुझे इससे ही प्रीत है ,


इक सामने का स्तंभ है ,
जिसका सरिया बुलंद है ,
वो मेरी छत को टिकाये खड़ा है ,
शायद यह सरिया शकतीशाली बड़ा है !!


मेरा तीसरा स्तंभ सबसे अनोखा है ,
कब कमजोर हो जायेगा सब आँख का धोखा है ,
यह तो कुछ हिस्सों से बना है ,
इसका एक अंश मेरे आंसुओं से सना है ,


जब लगता है मैं ढेह जाउंगी ,
यह स्तंभ मुझे संभालता है ,
अपने विश्वास को मेरे अस्तित्व में ढालता है !!!


जल्द ही मुझे छूता स्तंभ बनाना है ,
इस छत को अब मंजिल बनाना है ,
पर इस स्तंभ की ज़िम्मेदारी बड़ी है ,
मुझे संभाला है उसे थोड़ी मुश्किल घडी है ,


देखना यह है की यह किस्मत क्या रंग दिखाएगी ,
मंजिल बनेगी यहाँ या यह छत भी ढेह जाएगी !!!!