Sunday, August 22, 2010

dga...... "दगा"

after a long tym m writing something romantic...... awaiting for ur comments..... :)


chhup chhup ke chahaa tumhe par izhaar-e-mohabbat se darte hai,
"......" teri yaad me aksar hum ik raat guzara karte hai......

pyar ke badle pyar mile aisa to zaruri nahi,
fir bhi hum tere hone ki ik aas lagaya karte hai.....

duniya ki bheedh me tujhe thaam na paye to kya hua,
har sajde me hum tere liye yeh sar jhukaya karte hai......

tujhe dekh ke kisi ki baahaon me yeh dil jalta kuch iss tarah,
jaise sholey kisi shabnam ko jalaya karte hain.....

jab tak chaha dil se sabko,baat baat pe toota dil,
hue jo pathar log hume pyar ki murat kehte hai....

ladte hain har roz hum sab,haar jeet ke maslo par,
par pyar ki jeet ko dil ki haar hum he log toh kehte hai......

humko andekha kar ke wo sabko chaha karte hai,
pyar bhi mera chahe mujhe shayad isse he kismat kehte hai...

tu sapna hain ya haqiqat iss kashmaqash me hai yeh dil,
par har sapne me tere liye sej sajaya karte hai....

jhooth hai duniya daari sab,pyar mohabbat or jeena,
maut he aakhir sabka saath nibhaya karti hai........


jab tak karte the dhoka,duniya humari wafa ko tarasti the.
ki jo wafa humne to dhokhe ne bhi humse dagga kar li.....



छुप छुप के चाहा तुम्हे पर इज़हार -ए-मोहब्बत से डरते है ,
"......" तेरी याद में अक्सर हम इक रात गुज़ारा करते है ......

प्यार के बदले प्यार मिले ऐसा तो ज़रूरी नहीं ,
फिर भी हम तेरे होने की इक आस लगाया करते है .....

दुनिया की भीढ़ में तुझे थाम ना पाए तो क्या हुआ ,
हर सजदे में हम तेरे लिए यह सर झुकाया करते है ......

तुझे देख के किसी की बाहों में यह दिल जलता कुछ इस तरह ,
जैसे शोले किसी शबनम को जलाया करते हैं .....

जब तक चाहा दिल से सबको ,बात बात पे टूटा दिल ,
हुए जो पत्थर लोग हमे प्यार की मूरत कहते है ....

लड़ते हैं हर roz हम सब ,हार जीत ke मसलो पर ,
पर प्यार की जीत को दिल की हार hum ही लोग तो कहते है ......

हमको अनदेखा कर के वो सबको चाहा करते है ,
प्यार भी मेरा चाहे मुझे शायद इससे ही किस्मत कहते है ...

तू सपना हैं या हकीक़त इस कश्मक़श में है यह दिल ,
पर हर सपने में तेरे लिए सेज सजाया करते है ....

झूठ है दुनिया दारी सब ,प्यार मोहब्बत और जीना ,
मौत ही आखिर सबका साथ निभाया करती है ........


जब तक करते थे धोका ,दुनिया हमारी वफ़ा को तरसती थे .
की जो वफ़ा हमने तो धोखे ने भी हमसे दगा कर ली .....