Sunday, April 3, 2011

Mulakaat

my serious apology to those who wont b able to understand dis.....

aaj yu hin tanah raaste me chalte hue mujhe wo mili,
wahi shaant hasta hua aur apni aankhon mein tanhayion ka samndar samet ta hua chehra,
itne saalon me kuch bhi na badla tha usme,
kuch badla tha to uski nazaron me mujhe dekhne ka nazaria....


ghanto yuhi sunsaan sadak par baithe rhe hum dono,
humari khamoshi ne ik dooje ko gale lagaya,
uss sanaate ne guftagu ki,
unn sile hue honthon ne aur num aankhon ne apnepan ka ehsaas dilaya
aur fir jhalakte hue aansuon ne ek ek yaad taaza kar di........


kitna darr rhi the main uss sehmi hui surat se,
itni bheedh bhari duniya mein , usne ek baar fir mujhe dhoondh liya tha....
maine usse hazzaron sawal pooche,
par wo khamosh rhi,
uss se itne saalon baad bhi zinda hone ka raaz poocha,
wo patthar ki tarah sithar the,

par jab main haar kar usse door chali,
to kisse bache ki kilkari si mitthi awaaz ne kaha-
" chahe tune mujh par kafan odha dia,
par tere he seene ki tanhayi me samaati hun main,
chahe laakh koshish kar tu mujhe kamjoor banane ki,
terei har koshish se apni aabha badhati hun main ,
chahe duniya ke saamne tu mujhe maar de "AALISHA"
par aaj bhi khuda ke aage khud ko "AALISHA" bulati hun main"....


hindi version:
आज यू हीं तनहा रास्ते में चलते हुए मुझे वो मिली ,
वही शांत हँसता हुआ और अपनी आँखों में तन्हयिओन का समन्दर समेट ता हुआ चेहरा ,
इतने सालों में कुछ भी न बदला था उसमे ,
कुछ बदला था तो उसकी नज़रों में मुझे देखने का नज़रिया ....


घंटो युही सुनसान सड़क पर बैठे रहे हम दोनों ,
हमारी ख़ामोशी ने इक दूजे को गले लगाया ,
उस सनाते ने गुफ्तगू की ,
उन् सिले हुए होंठो ने और नुम आँखों ने अपनेपन का एहसास दिलाया ,
और फिर झलकते हुए आंसुओं ने एक एक याद ताज़ा कर दी ........


कितना डर रही थे मैं उस सहमी हुई सूरत से ,
इतनी भीढ़ भरी दुनिया में , उसने एक बार फिर मुझे ढूंढ लिया था ....
मैंने उससे हज्ज़रों सवाल पूछे ,
पर वो खामोश रही ,
उस से इतने सालों बाद भी जिंदा होने का राज़ पुछा ,
वो पत्थर की तरह सथिर थी ,

पर जब मैं हार कर उससे दूर चली ,
तो किस्से बचे की किलकारी सी मिट्ठी आवाज़ ने कहा -
" चाहे तुने मुझ पर कफ़न ओढा दिया ,
पर तेरे हे सीने की तन्हाई में समाती हूँ मैं ,
चाहे लाख कोशिश कर तू मुझे कम्जूर बनाने की ,
तेरी हर कोशिश से अपनी आभा बढाती हूँ मैं ,
चाहे दुनिया के सामने तू मुझे मार दे "आलिशा "
पर आज भी खुदा के आगे खुद को गर्व से "आलिशा " बुलाती हूँ मैं "....